आज़ादी का दिन मना, नई ग़ुलामी बीच; सूखी धरती, सूना अंबर, मन-आंगन में कीच; मन-आंगम में कीच,
Category: हिंदी कविताएँ
उस रात तुम आई थीं प्रिये – विकास कुमार (अतिथि लेखक)
जब घड़ी की टक टक सुनाई दे रही थी घोर तम के शुनशान अंधेरे में जुगनू उस रात के तम से लड़ रहे थे और अपनी जीत का जश्न मना रहे थे उस रात तुम आई थीं प्रिये
नीड़ का निर्माण – हरिवंशराय बच्चन
नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्वान फिर-फिर! वह उठी आँधी कि नभ में छा गया सहसा अँधेरा, धूलि धूसर बादलों ने भूमि को इस भाँति घेरा,
मनाली मत जइयो – अटल बिहारी वाजपेयी
मनाली मत जइयो, गोरी राजा के राज में। जइयो तो जइयो, उड़िके मत जइयो, अधर में लटकीहौ, वायुदूत के जहाज़ में।
तुम मत भूलना उनको – विकास कुमार (अतिथि लेखक)
तुम मत भूलना उनको, वतन पर फक्र था , जिनको मिलाकर धूल में उनको, लगाकर माटी का चंदन,
कौरव कौन, कौन पांडव – अटल बिहारी वाजपेयी
कौरव कौन कौन पांडव, टेढ़ा सवाल है| दोनों ओर शकुनि का फैला कूटजाल है|
दुआ करो – विकास कुमार (अतिथि लेखक)
दुआ करो जल सके दिया हो उजाला रोशन हो हर कोना
हरी हरी दूब पर – अटल बिहारी वाजपेयी
हरी हरी दूब पर ओस की बूंदे अभी थी, अभी नहीं हैं| ऐसी खुशियाँ जो हमेशा हमारा साथ दें कभी नहीं थी, कहीं नहीं हैं|
दूध में दरार पड़ गई – अटल बिहारी वाजपेयी
ख़ून क्यों सफ़ेद हो गया? भेद में अभेद खो गया। बँट गये शहीद, गीत कट गए, कलेजे में कटार दड़ गई। दूध में दरार पड़ गई।
क्षमा याचना – अटल बिहारी वाजपेयी
क्षमा करो बापू! तुम हमको, बचन भंग के हम अपराधी, राजघाट को किया अपावन, मंज़िल भूले, यात्रा आधी।








