आ कि मेरी जान को क़रार नहीं है – मिर्ज़ा ग़ालिब

आ कि मेरी जान को क़रार नहीं है ताक़ते-बेदादे-इन्तज़ार नहीं है देते हैं जन्नत हयात-ए-दहर के बदले नश्शा बअन्दाज़-ए-ख़ुमार नहीं है

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असद’ हम वो जुनूँ-जौलाँ – मिर्ज़ा ग़ालिब

'असद' हम वो जुनूँ-जौलाँ गदा-ए-बे-सर-ओ-पा हैं कि है सर-पंजा-ए-मिज़्गान-ए-आहू पुश्त-ख़ार अपना

अफ़सोस कि दनदां – मिर्ज़ा ग़ालिब

अफ़सोस कि दनदां का किया रिज़क़ फ़लक ने जिन लोगों की थी दर-ख़ुर-ए-अक़्द-ए-गुहर अंगुश्त  काफ़ी है निशानी तिरा छल्ले का न देना  ख़ाली मुझे दिखला के ब-वक़्त-ए-सफ़र अंगुश्त लिखता हूं असद सोज़िश-ए दिल से सुख़न-ए गरम ता रख न सके कोई मिरे हरफ़ पर अनगुशत

ये न थी हमारी क़िस्मत – मिर्ज़ा ग़ालिब

ये न थी हमारी क़िस्मत के विसाले यार होता अगर और जीते रहते यही इन्तज़ार होता

अज़ मेहर ता-ब-ज़र्रा दिल-ओ-दिल है आइना – मिर्ज़ा ग़ालिब

अज़ मेहर ता-ब-ज़र्रा दिल-ओ-दिल है आइना  तूती को शश जिहत से मुक़ाबिल है आइना

कहूँ जो हाल, तो कहते हो – मिर्ज़ा ग़ालिब

कहूं जो हाल तो कहते हो 'मुद्द`आ कहिये' तुम्हीं कहो कि जो तुम यूं कहो तो क्या कहिये न कहियो त`न से फिर तुम कि हम सितमगर हैं मुझे तो ख़ू है कि जो कुछ कहो बजा कहिये

ये न थी हमारी क़िस्मत – मिर्ज़ा ग़ालिब

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता अगर और जीते रहते यही इंतज़ार होता   तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना कि ख़ुशी से मर न जाते अगर एतबार होता

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी – मिर्ज़ा ग़ालिब

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी के हर ख़्वाहिश पे दम निकले बहुत निकले मेरे अरमाँ लेकिन फिर भी कम निकले निकलना खुळ से आदम का सुनते आये हैं लेकिन बहुत बे-आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले

दिया है दिल – मिर्ज़ा ग़ालिब

दिया है दिल अगर उस को , बशर है क्या कहिये हुआ रक़ीब तो वो , नामाबर है , क्या कहिये यह ज़िद की आज न आये और आये बिन न रहे काजा से शिकवा हमें किस क़दर है , क्या कहिये

अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा – मिर्ज़ा ग़ालिब

अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा जाता हूँ दाग़-ए-हसरत-ए-हस्ती लिये हुए हूँ शम्मा-ए-कुश्ता दरख़ुर-ए-महफ़िल नहीं रहा