झुंझलाए है लजाए है  – ख़ुमार बाराबंकवी

झुंझलाए है लजाए है फिर मुस्कुराए है
इसके दिमाग से उन्हे हम याद आए है

अब जाके आह करने के आदाब आए है
दुनिया समझ रही है कि हम मुस्कुराए है

गुज़रे है मयकदे से जो तौबा के बाद हम
कुछ दूर आदतन भी कदम लड़खड़ाए है

ए जोश-ए-दुनिया देख, न करना खजी मुझे
आँखे मेरी ज़रूर है आँसू पराए है

ए मौत ए बहिश्ते सुकू आ खुशामदे
हम ज़िन्दगी में पहले-पहल मुस्कुराए है

कितनी भी मयकदे में है साकी पिला दे आज
हम तशना गाँव ज़ोद के सहरा से आए है

इंसान जीतेजी करे तौबा खताओ से
मजबूरियो ने कितने फरिश्ते बनाए है

काबे में खयरियत तो है सब हज़रत-ए-“खुमार”
ये गैर है जनाब यहाँ कैसे आए है

– खुमार बाराबंकवी

खुमार बाराबंकवी की अन्य प्रसिध रचनाएँ

  • एक पल में एक सदी का मज़ा
  • दुनिया के ज़ोर प्यार के दिन
  • ये मिसरा नहीं है
  • कभी शेर-ओ-नगमा बनके
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  • तेरे दर से उठकर
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  • क्या हुआ हुस्न हमसफ़र है या नहीं (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • मुझ को शिकस्ते दिल का मज़ा याद आ गया (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • गमे-दुनिया बहुत इज़ारशाँ है (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • बुझ गया दिल हयात बाकी है (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • वो सवा याद आये भुलाने के बाद (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • हम उन्हें वो हमें भुला बैठे (शीघ्र प्रकाशित होगी)

शायरी ई-बुक्स ( Shayari eBooks)static_728x90

 

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