दुनिया के ज़ोर प्यार के दिन याद आ गये  – ख़ुमार बाराबंकवी

दुनिया के ज़ोर प्यार के दिन याद आ गये
दो बाज़ुओ की हार के दिन याद आ गये

गुज़रे वो जिस तरफ से बज़ाए महक उठी
सबको भरी बहार के दिन याद आ गये

ये क्या कि उनके होते हुए भी कभी-कभी
फोर्दोस-ए-इंत्ज़ार के दिन याद आ गये

वादे का उनके आज खयाल आ गया मुझे
शक और ऐतबार के दिन याद आ गये

नादा थे जब्त-ए-गम का बहुत हज़रत-ए-“खुमार”
रो-रो जिए थे जब वो याद आ गये

– खुमार बाराबंकवी

खुमार बाराबंकवी की अन्य प्रसिध रचनाएँ

  • एक पल में एक सदी का मज़ा
  • दुनिया के ज़ोर प्यार के दिन
  • ये मिसरा नहीं है (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • कभी शेर-ओ-नगमा बनके (शीघ्र प्रकाशित होगी)
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  • तेरे दर से उठकर (शीघ्र प्रकाशित होगी)
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  • झुंझलाए है लजाए है (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • रुख़्सत-ए-शबाब (शीघ्र प्रकाशित होगी)
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  • हाल-ए-गम उन को सुनाते जाइए (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • हुस्न जब मेहरबान हो तो क्या कीजिए (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • हिज्र की शब है और उजाला है (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • ऐसा नहीं कि उन से मोहब्बत नहीं रही (शीघ्र प्रकाशित होगी)
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  • मुझ को शिकस्ते दिल का मज़ा याद आ गया (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • गमे-दुनिया बहुत इज़ारशाँ है (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • अकेले हैं वो और झुंझला रहे हैं (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • बुझ गया दिल हयात बाकी है (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • वो सवा याद आये भुलाने के बाद (शीघ्र प्रकाशित होगी)
  • हम उन्हें वो हमें भुला बैठे (शीघ्र प्रकाशित होगी)

 

 

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