कविता संग्रह

आज मुझसे बोल, बादल – हरिवंशराय बच्चन

आज मुझसे बोल, बादल! तम भरा तू, तम भरा मैं, ग़म भरा तू, ग़म भरा मैं, आज तू अपने हृदय से हृदय मेरा तोल, बादल आज मुझसे बोल, बादल!

अश्रु यह पानी नहीं है – महादेवी वर्मा

अश्रु यह पानी नहीं है, यह व्यथा चंदन नहीं है! यह न समझो देव पूजा के सजीले उपकरण ये, यह न मानो अमरता से माँगने आए शरण ये, स्वाति को खोजा नहीं है औ' न सीपी को पुकारा, मेघ से माँगा न जल, इनको न भाया सिंधु खारा! शुभ्र मानस से छलक आए तरल ये ज्वाल मोती, प्राण की निधियाँ अमोलक बेचने का धन नहीं है।

मैं तो झोंका हूँ – कुमार विश्वास

मैं तो झोंका हूँ हवाओं का उड़ा ले जाऊँगा जागती रहना, तुझे तुझसे चुरा ले जाऊँगा हो के क़दमों पर निछावर फूल ने बुत से कहा ख़ाक में मिल कर भी मैं ख़ुश्बू बचा ले जाऊँगा कौन-सी शै तुझको पहुँचाएगी तेरे शहर तक ये पता तो तब चलेगा जब पता ले जाऊँगा

युग की उदासी – हरिवंशराय बच्चन

अकारण ही मैं नहीं उदास अपने में ही सिकुड सिमट कर जी लेने का बीता अवसर जब अपना सुख दुख था, अपना ही उछाह उच्छ्वास अकारण ही मैं नहीं उदा

प्रिय चिरंतन है सजनि – महादेवी वर्मा

प्रिय चिरंतन है सजनि, क्षण-क्षण नवीन सुहासिनी मै! श्वास में मुझको छिपाकर वह असीम विशाल चिर घन शून्य में जब छा गया उसकी सजीली साध-सा बन, छिप कहाँ उसमें सकी बुझ-बुझ जली चल दामिनी मैं।

मैं तुम्हें ढूंढने – कुमार विश्वास

मैं तुम्हें ढूंढने स्वर्ग के द्वार तक रोज़ जाता रहा, रोज़ आता रहा तुम ग़ज़ल बन गईं, गीत में ढल गईं मंच से मैं तुम्हें गुनगुनाता रहा

यात्रा और यात्री – हरिवंशराय बच्चन

साँस चलती है तुझे चलना पड़ेगा ही मुसाफिर! चल रहा है तारकों का दल गगन में गीत गाता, चल रहा आकाश भी है शून्य में भ्रमता-भ्रमाता, पाँव के नीचे पड़ी अचला नहीं, यह चंचला है, एक कण भी, एक क्षण भी एक थल पर टिक न पाता,

बताता जा रे अभिमानी! – महादेवी वर्मा

कण-कण उर्वर करते लोचन स्पन्दन भर देता सूनापन जग का धन मेरा दुख निर्धन तेरे वैभव की भिक्षुक या कहलाऊँ रानी! बताता जा रे अभिमानी!

मेरे सपनों के भाग में – कुमार विश्वास

कि जैसे दुनिया देखने की ज़िद के सही साँझ न होने पर पूरा, सो जाए मचल-मचल कर, रोता हुआ बच्चा! तो तैर आती हैं उस के सपनों में,

साथी साथ ना देगा दु:ख भी – हरिवंशराय बच्चन

काल छीनने दु:ख आता है जब दु:ख भी प्रिय हो जाता है नहीं चाहते जब हम दु:ख के बदले चिर सुख भी! साथी साथ ना देगा दु:ख भी!