बचपन – सुभद्रा कुमारी चौहान

बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥

क़दम मिला कर चलना होगा – अटल बिहारी वाजपेयी

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों में हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा।

अग्निपथ – हरिवंशराय बच्चन

यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

पंद्रह अगस्त की पुकार – अटल बिहारी वाजपेयी

आज़ादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाकी है, रावी की शपथ न पूरी है।।

ज़बान – जावेद अख़्तर

ये आवाज़ों की तस्वीरें कैसे बनी थीं आवाज़ें तस्वीर बनीं या तस्वीरें आवाज़ बनी थीं

तीर पर कैसे रुकूँ मैं – हरिवंशराय बच्चन

तीर पर कैसे रुकूँ मैं, आज लहरों में निमंत्रण! रात का अंतिम प्रहर है, झिलमिलाते हैं सितारे, वक्ष पर युग बाहु बाँधे, मैं खड़ा सागर किनारे वेग से बहता प्रभंजन, केश-पट मेरे उड़ाता,

मेरा आँगन मेरा पेड़ – जावेद अख़्तर

मेरा आँगन कितना कुशादा कितना बड़ा था जिसमें मेरे सारे खेल समा जाते थे

परम्परा – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

परंपरा को अंधी लाठी से मत पीटो उसमें बहुत कुछ है जो जीवित है जीवन दायक है जैसे भी हो ध्वंस से बचा रखने लायक है

मधुशाला – हरिवंशराय बच्चन

मृदु भावों के अंगूरों की आज बना लाया हाला, प्रियतम, अपने ही हाथों से आज पिलाऊँगा प्याला, पहले भोग लगा लूँ तेरा फिर प्रसाद जग पाएगा, सबसे पहले तेरा स्वागत करती मेरी मधुशाला।

कृष्ण की चेतावनी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

रामधारी सिंह 'दिनकर' जी का महाकाव्य कृष्ण की चेतावनी रामधारी सिंह 'दिनकर' जी के प्रसिध काव्यों में से एक "रश्मीरथि" की एक बड़ी लोकप्रिय कविता हैं | वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर। सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है। मैत्री … Continue reading कृष्ण की चेतावनी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’ →