दुआ करो – विकास कुमार (अतिथि लेखक)

दुआ करो जल सके दिया हो उजाला रोशन हो हर कोना

समस्या और समाधान – अमीक सरकार / कुमार शान्तनु

आज कल दुनिया में कुछ ऐसा उठ रहा है तूफ़ान, की बात बात पर "हक़" मांग बैठता है हर इंसान।

आग की फसल – विकास कुमार (अतिथि लेखक)

तुम अधूरे मैं अधूरा दिन अधूरे रात अधूरी भावनाएँ जो बह रहीं हैं उठ रहीं तरंग अधूरी

अधूरे से हम – विकास कुमार (अतिथि लेखक)

तुम अधूरे मैं अधूरा दिन अधूरे रात अधूरी भावनाएँ जो बह रहीं हैं उठ रहीं तरंग अधूरी

मुझे नहीं पता – कुमार शान्तनु

ये जो बतियाँ जग रही है राहों पर ये रौशनी दे रही है या अँधेरा मुझे नहीं पता

शायद मैं …सही था – कुमार शान्तनु

उस दिन जाने से पहले वो कुछ कहना चाहती थी पर मैं उसकी बोलती आँखों को सुन ही नहीं पाया

मैं और मेरी कॉफ़ी (कहानी) – कुमार शान्तनु

लव बींस (love beans) तनहा सा रहता था मैं इस तनहा शहर में, कभी खुद से छिपता , कभी खुद से मिलता था। अक्सर देर से सोता था , देर से उठता था। न जाने कितने बरस हो गए थे मुझ जैसे आलसी को सुबह सवेरे की दुनिया देखे सुने । आज बैठा हूँ हाथ में कॉफ़ी (coffee-) का … Continue reading मैं और मेरी कॉफ़ी (कहानी) – कुमार शान्तनु →