निशि चली जा रही थी काली प्राची में फैली थी लाली। विहगों के कलरव करने से, थी गूँज रही डाली डाली॥
Category: हिंदी कविताएँ
जौहर : मंगलाचरन – श्याम नारायण पांडेय
शब्द में है अर्थ बनकर, अर्थ में है शब्द बनकर। जा रहे युग - कल्प उनमें, जा रहा है अब्द बनकर वहीं जा रहा पूजा करने , लेने सतियों की पग धूल, वहीँ हमारा दीप जलेगा , वहीँ चढ़ेगा माला फूल ||
जौहर : परिचय – श्याम नारायण पांडेय
जहां आन पर माँ बहनों ने , जौहर व्रत करना सीखा , स्वतंत्रता के लिए देश हित बच्चों ने मरना सीखा | वहीं जा रहा पूजा करने , लेने सतियों की पग धूल, वहीँ हमारा दीप जलेगा , वहीँ चढ़ेगा माला फूल ||
बचपन – सुभद्रा कुमारी चौहान
बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥
चूँ-चूँ चूँ-चूँ चूहा बोले – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
चूँ-चूँ चूँ-चूँ चूहा बोले, म्याऊँ म्याऊँ बिल्ली। ती-ती, ती-ती कीरा बोले, झीं-झीं झीं-झीं झिल्ली।
क़दम मिला कर चलना होगा – अटल बिहारी वाजपेयी
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों में हँसते-हँसते, आग लगाकर जलना होगा। क़दम मिलाकर चलना होगा।
अग्निपथ – हरिवंशराय बच्चन
यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
पंद्रह अगस्त की पुकार – अटल बिहारी वाजपेयी
आज़ादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाकी है, रावी की शपथ न पूरी है।।
ज़बान – जावेद अख़्तर
ये आवाज़ों की तस्वीरें कैसे बनी थीं आवाज़ें तस्वीर बनीं या तस्वीरें आवाज़ बनी थीं
चंदा मामा – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
चंदा मामा दौड़े आओ, दूध कटोरा भर कर लाओ। उसे प्यार से मुझे पिलाओ, मुझ पर छिड़क चाँदनी जाओ।







