मशवरे – कैफ़ि आज़मी

पीरी:
ये आँधी ये तूफ़ान ये तेज़ धारे
कड़कते तमाशे गरजते नज़ारे
अंधेरी फ़ज़ा साँस लेता समन्दर
न हमराह मिशाल न गर्दूँ पे तारे

मुसाफ़िर ख़ड़ा रह अभी जी को मारे

शबाब:
उसी का है साहिल उसी के कगारे
तलातुम में फँसकर जो दो हाथ मारे
अंधेरी फ़ज़ा साँस लेता समन्दर
यूँ ही सर पटकते रहेंगे ये धारे

कहाँ तक चलेगा किनारे-किनारे

– कैफ़िआज़मी

  1. पीरी=बुढापा
  2. शबाब=यौवन
  3. फ़ज़ा=वातावरण
  4. मिशाल=मशाल
  5. गर्दूँ=आकाश
  6. साहिल=किनारा
  7. तलातुम=बाढ

कैफ़िआज़मीजीकीअन्यप्रसिधरचनाएँ

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