कविता संग्रह

जिहि फन फुत्कार उड़त पहाड़ भार – भूषण

जिहि फन फुत्कार उड़त पहाड़ भार,            कूरम कठिन जनु कमल बिदगिलो.

झाँसी की रानी – सुभद्रा कुमारी चौहान

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।

गरुड़ को दावा – भूषण

गरुड़ को दावा जैसे नाग के समूह पर दावा नाग जूह पर सिंह सिरताज को

चमकीले तारे – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

क्या चमकीले तारे हैं, बड़े अनूठे, प्यारे हैं! आँखों में बस जाते हैं, जी को बहुत लुभाते हैं! जगमग-जगमग करते हैं,

पद्मिनी गोरा बादल – नरेंद्र मिश्र

पद्मिनी गोरा बादल नरेंद्र मिश्रा द्वारा हिंदी में एक अद्भुत कविता है यह राजपूत योद्धाओं गोरा और बादल की बहादुरी का वर्णन करता है जिन्होंने चित्तोड़ के राजा रावल रतन सिंह को बचाते हैं जिन्हें अलाउद्दीन खिलजी ने बंदी बना लिया था।

छत्रसाल : प्रशस्ति – भूषण

कवि भूषण ने महाराज छत्रसाल की प्रशंसा में ‘छत्रसाल दशक’ की रचना की थी । यह कविता उसी का अंश है । इन पंक्तियों में युद्धरत छत्रसाल की तलवार और बरछी के पराक्रम का वर्णन किया है ।

राखी हिन्दुवानी हिन्दुवान को तिलक राख्यौ – भूषण

राखी हिन्दुवानी हिन्दुवान को तिलक राख्यौ अस्मृति पुरान राखे वेद धुन सुनी मैं

ब्रह्म के आनन तें निकसे – भूषण

ब्रह्म के आनन तें निकसे अत्यंत पुनीत तिहूँ पुर मानी . राम युधिष्ठिर के बरने बलमीकहु व्यास के अंग सोहानी.

इन्द्र जिमि जंभ पर – भूषण

इन्द्र जिमि जंभ पर, बाडब सुअंभ पर, रावन सदंभ पर, रघुकुल राज हैं। पौन बारिबाह पर, संभु रतिनाह पर, ज्यौं सहस्रबाह पर राम-द्विजराज हैं॥

परिचय – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

सलिल कण हूँ, या पारावार हूँ मैं स्वयं छाया, स्वयं आधार हूँ मैं बँधा हूँ, स्वप्न हूँ, लघु वृत हूँ मैं नहीं तो व्योम का विस्तार हूँ मैं