जिहि फन फुत्कार उड़त पहाड़ भार – भूषण

जिहि फन फुत्कार उड़त पहाड़ भार,            कूरम कठिन जनु कमल बिदगिलो.

गरुड़ को दावा – भूषण

गरुड़ को दावा जैसे नाग के समूह पर दावा नाग जूह पर सिंह सिरताज को

छत्रसाल : प्रशस्ति – भूषण

कवि भूषण ने महाराज छत्रसाल की प्रशंसा में ‘छत्रसाल दशक’ की रचना की थी । यह कविता उसी का अंश है । इन पंक्तियों में युद्धरत छत्रसाल की तलवार और बरछी के पराक्रम का वर्णन किया है ।

राखी हिन्दुवानी हिन्दुवान को तिलक राख्यौ – भूषण

राखी हिन्दुवानी हिन्दुवान को तिलक राख्यौ अस्मृति पुरान राखे वेद धुन सुनी मैं

ब्रह्म के आनन तें निकसे – भूषण

ब्रह्म के आनन तें निकसे अत्यंत पुनीत तिहूँ पुर मानी . राम युधिष्ठिर के बरने बलमीकहु व्यास के अंग सोहानी.

इन्द्र जिमि जंभ पर – भूषण

इन्द्र जिमि जंभ पर, बाडब सुअंभ पर, रावन सदंभ पर, रघुकुल राज हैं। पौन बारिबाह पर, संभु रतिनाह पर, ज्यौं सहस्रबाह पर राम-द्विजराज हैं॥