जौहर : मंगलाचरन – श्याम नारायण पांडेय

शब्द में है अर्थ बनकर, अर्थ में है शब्द बनकर। जा रहे युग - कल्प उनमें, जा रहा है अब्द बनकर वहीं जा रहा पूजा करने , लेने सतियों की पग धूल, वहीँ हमारा दीप जलेगा , वहीँ चढ़ेगा माला फूल ||

जौहर : परिचय – श्याम नारायण पांडेय

जहां आन पर माँ बहनों ने , जौहर व्रत करना सीखा , स्वतंत्रता के लिए देश हित बच्चों ने मरना सीखा | वहीं जा रहा पूजा करने , लेने सतियों की पग धूल, वहीँ हमारा दीप जलेगा , वहीँ चढ़ेगा माला फूल ||

अग्निपथ – हरिवंशराय बच्चन

यह महान दृश्य है, चल रहा मनुष्य है, अश्रु श्वेत रक्त से, लथपथ लथपथ लथपथ, अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।

आरम्भ है प्रचण्ड – पियूष मिश्रा

आरम्भ है प्रचण्ड, बोले मस्तकों के झुंड, आज ज़ंग की घड़ी की तुम गुहार दो आन बान शान या कि जान का हो दान आज इक धनुष के बाण पे उतार दो मन करे सो प्राण दे, जो मन करे सो प्राण ले, वही तो एक सर्वशक्तिमान है कृष्ण की पुकार है, ये भागवत का … Continue reading आरम्भ है प्रचण्ड – पियूष मिश्रा →