वहीं हैं, दिल के क़राइन तमाम कहते हैं वो इक ख़लिश कि जिसे तेरा नाम कहते हैं तुम आ रहे हो कि बजती हैं मेरी ज़ंजीरें न जाने क्या मेरे दीवारो-बाम कहते हैं यही कनारे-फ़लक का सियहतरीं गोशा यही है मतलए-माहे-तमाम कहते हैं
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वफ़ा-ए-वा’दः नहीं – फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’
वफ़ा-ए-वा'दः नहीं, वा'दः-ए-दिगर भी नहीं वो मुझसे रूठे तो थे, लेकिन इस क़दर भी नहीं बरस रही है हरीमे-हवस मे दौलते-हुस्न गदा-ए-इ'श्क़ के कासे मे इक नज़र भी नहीं
तेरी सूरत – फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’
तेरी सूरत जो दिलनशीं की है आशना शक्ल हर हसीं की है हुस्न से दिल लगा के हस्ती की हर घड़ी हमने आतशीं की है सुबहे-गुल हो की शामे-मैख़ाना मदह उस रू-ए-नाज़नीं की है
सितम सिखलायेगा रस्मे-वफा – फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’
सितम सिखलायेगा रस्मे-वफा, ऐसे नहीं होता सनम दिखलायेंगे राहे-खुदा, ऐसे नहीं होता गिनो सब हसरतें, जो खूं हुई हैं तन के मक़तल में मेरे क़ातिल हिसाबे-खूबहां, ऐसे नहीं होता
सितम की रस्में – फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’
सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन, न थी तेरी अंजुमन से पहले सज़ा खता-ए-नज़र से पहले, इताब ज़ुर्मे-सुखन से पहले जो चल सको तो चलो के राहे-वफा बहुत मुख्तसर हुई है मुक़ाम है अब कोई न मंजिल, फराज़े-दारो-रसन से पहले
शफ़क़ की राख में – फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’
शाख़ पर ख़ूने-गुल रवाँ है वही शोख़ी-ए-रंगे-गुलसिताँ है वही सर वही है तो आस्ताँ है वही जाँ वही है तो जाने-जाँ है वही अब जहाँ मेहरबाँ नहीं कोई कूचः-ए-यारे-मेहरबाँ है वही
शाख़ पर ख़ूने-गुल रवाँ है वही – फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’
शाख़ पर ख़ूने-गुल रवाँ है वही शोख़ी-ए-रंगे-गुलसिताँ है वही सर वही है तो आस्ताँ है वही जाँ वही है तो जाने-जाँ है वही अब जहाँ मेहरबाँ नहीं कोई कूचः-ए-यारे-मेहरबाँ है वही
सब क़त्ल होके – फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’
सब क़त्ल होके तेरे मुक़ाबिल से आये हैं हम लोग सुर्ख-रू हैं कि मंजिल से आये हैं शम्मए नज़र, खयाल के अंजुम, जिगर के दाग़ जितने चिराग़ हैं तेरी महफ़िल से आये हैं
आपकी याद आती रही रात-भर – फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’
"आपकी याद आती रही रात-भर" चाँदनी दिल दुखाती रही रात-भर गाह जलती हुई, गाह बुझती हुई शम-ए-ग़म झिलमिलाती रही रात-भर
रक़ीब के नाम – रुचिका मान ‘रूह’
वो...जिसने बड़ी नवाज़िश से मेरी सियाह रातों पे एहसान किया था और बड़े नाज़ों से मेरी बेपनाह वफ़ा का पैमाँ लिया था जो...नज़ाकत से मेरी रूह को फना कर गया और नाहक ही मेरे इश्क़ को गुनाह कर गया वो...मेरी ज़ीस्त कि हकीकत मेरी साँसों की कैफियत


