कुछ शेर  – जावेद अख़्तर

दर्द अपनाता है पराए कौन  कौन सुनता है और सुनाए कौन  कौन दोहराए वो पुरानी बात ग़म अभी सोया है जगाए कौन 

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प्राप्ति – सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”

तुम्हें खोजता था मैं, पा नहीं सका, हवा बन बहीं तुम, जब मैं थका, रुका ।

व्याल-विजय – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

झूमें झर चरण के नीचे मैं उमंग में गाऊँ. तान, तान, फण व्याल! कि तुझ पर मैं बाँसुरी बजाऊँ।  यह बाँसुरी बजी माया के मुकुलित आकुंचन में, यह बाँसुरी बजी अविनाशी के संदेह गहन में  अस्तित्वों के अनस्तित्व में,महाशांति के तल में, यह बाँसुरी बजी शून्यासन की समाधि निश्चल में। 

मुन्ना-मुन्नी – द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

मुन्ना-मुन्नी ओढ़े चुन्नी, गुड़िया खूब सजाई किस गुड्डे के साथ हुई तय इसी आज सगाई मुन्ना-मुन्नी ओढ़े चुन्नी, कौन खुशी की बात है, आज तुम्हारी गुड़िया प्यारी की क्या चढ़ी बरात है!

दर्द अपनाता है पराए कौन  – जावेद अख़्तर

दर्द अपनाता है पराए कौन  कौन सुनता है और सुनाए कौन  कौन दोहराए वो पुरानी बात ग़म अभी सोया है जगाए कौन 

चुम्बन – सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”

लहर रही शशिकिरण चूम निर्मल यमुनाजल, चूम सरित की सलिल राशि खिल रहे कुमुद दल कुमुदों के स्मिति-मन्द खुले वे अधर चूम कर, बही वायु स्वछन्द, सकल पथ घूम घूम कर

अवकाश वाली सभ्यता – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

मैं रात के अँधेरे में सिताओं की ओर देखता हूँ  जिन की रोशनी भविष्य की ओर जाती है अनागत से मुझे यह खबर आती है  की चाहे लाख बदल जाये मगर भारत भारत रहेगा जो ज्योति दुनिया में  बुझी जा रही है वह भारत के दाहिने करतल पर जलेगी  यंत्रों से थकी हुयी धरती  उस रोशनी में चलेगी

माँ! यह वसंत ऋतुराज री! – द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

आया लेकर नव साज री ! मह-मह-मह डाली महक रही कुहु-कुहु-कुहु कोयल कुहुक रही संदेश मधुर जगती को वह देती वसंत का आज री! माँ! यह वसंत ऋतुराज री!

रोटी और स्वाधीनता – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

आजादी तो मिल गई, मगर, यह गौरव कहाँ जुगाएगा ? मरभुखे ! इसे घबराहट में तू बेच न तो खा जाएगा ? आजादी रोटी नहीं, मगर, दोनों में कोई वैर नहीं, पर कहीं भूख बेताब हुई तो आजादी की खैर नहीं।

वर दे, वीणावादिनि वर दे – सूर्यकांत त्रिपाठी “निराला”

वर दे, वीणावादिनि वर दे ! प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव         भारत में भर दे ! काट अंध-उर के बंधन-स्तर बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर; कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर         जगमग जग कर दे !