हर युग को अपना ‘राम’ चाहिए – अनिल कुमार सिंह

हर युग को अपना 'राम' चाहिए - अनिल कुमार सिंह

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ब्रह्म के आनन तें निकसे – भूषण

ब्रह्म के आनन तें निकसे अत्यंत पुनीत तिहूँ पुर मानी . राम युधिष्ठिर के बरने बलमीकहु व्यास के अंग सोहानी.

कृष्ण की चेतावनी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’

रामधारी सिंह 'दिनकर' जी का महाकाव्य कृष्ण की चेतावनी रामधारी सिंह 'दिनकर' जी के प्रसिध काव्यों में से एक "रश्मीरथि" की एक बड़ी लोकप्रिय कविता हैं | वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर। सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें, आगे क्या होता है। मैत्री … Continue reading कृष्ण की चेतावनी – रामधारी सिंह ‘दिनकर’