ख़ुश हैं सब – राज़िक अंसारी

बतलाते हैं सारे मंज़र ख़ुश हैं सब अन्दर से है टूटे बाहर ख़ुश हैं सब देख लो अपनी प्यास छुपाने का अंजाम बोल रहा है एक समन्दर ख़ुश हैं सब

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वाक़िफ़ हैं – राज़िक अंसारी

दिल की रंगीनियों से वाक़िफ़ हैं  फूल हैं, तितलियों से वाक़िफ़ हैं  आंधिओं की हंसी उड़ाएंगे जो हमारे दियों से वाक़िफ़ हैं 

चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं – राज़िक अंसारी

चलो चल कर वहीं पर बैठते हैं जहां पर सब बराबर बैठते हैं न जाने क्यों घुटन सी हो रही है बदन से चल के बाहर बैठते हैं

लड़ते देखता हूं – राज़िक अंसारी

मैं जब रिश्तों को लड़ते देखता हूं हवेली को उजड़ते देखता हूँ न जाने क्यों मुझे लगता है , मैं हूँ किसी को जब बिछड़ते देखता हूँ

दिल – राज़िक अंसारी

एक नन्हा मुन्ना बच्चा यही कोई 8-10 साल का फटा हुआ लिबास या यूं कहो पहनने के नाम पर बस चिथड़ा खींचता जा रहा है एक गाड़ी, बिना इंजन की, सही समझे-छकड़ा