द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

Dwarika-prasad-maheshwariकवि परिचय

शिक्षा और कविता को समर्पित द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का जीवन बहुत ही चित्ताकर्षक और रोचक है। उनकी कविता का प्रभाव सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार कृष्ण विनायक फड़के ने अपनी अंतिम इच्छा के रूप में प्रकट किया कि उनकी मृत्यु के पश्चात उनकी शवयात्रा में माहेश्वरी जी का बालगीत ‘हम सब सुमन एक उपवन के’ गाया जाए। फड़के जी का मानना था कि अंतिम समय भी पारस्परिक एकता का संदेश दिया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश सूचना विभाग ने अपनी होर्डिगों में प्राय: सभी जिलों में यह गीत प्रचारित किया और उर्दू में भी एक पुस्तक प्रकाशित हुई, जिसका शीर्षक था, ‘हम सब फूल एक गुलशन के’, लेकिन वह दृश्य सर्वथा अभिनव और अपूर्व था जिसमें एक शवयात्रा ऐसी निकली जिसमें बच्चे मधुर धुन से गाते हुए चल रहे थे, ‘हम सब सुमन एक उपवन के’। किसी गीत को इतना बड़ा सम्मान, माहेश्वरी जी की बालभावना के प्रति आदर भाव ही था। उनका ऐसा ही एक और कालजयी गीत है- वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो। उन्होंने बाल साहित्य पर 26 पुस्तकें लिखीं। इसके अतिरिक्त पांच पुस्तकें नवसाक्षरों के लिए लिखीं। उन्होंने अनेक काव्य संग्रह और खंड काव्यों की भी रचना की।

कृतियाँ

  • क्रौंचवध
  • सत्‍य की जीत (खंडकाव्‍य)
  • दीपक
  • गीतगंगा

बाल काव्‍य कृतियॉं:

  • सोने की कुल्‍हाड़ी
  • कातो और गाओ
  • सूरज सा चमकूँ मैं
  • माखन मिश्री
  • हाथी घोड़ा पालकी
  • अंजन खंजन
  • सीढ़ी सीढ़ी चढ़ते हैं
  • हाथी आता झूम के
  • बालगीतायन
  • चाँदी की डोरी
  • ना मोती ना मुसकान
  • बाल गीतायन

काव्यशाला द्वारा प्रकाशित रचनाएँ

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