प्रयाणगीत – जयशंकर प्रसाद

हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती
स्वयंप्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती
अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़-प्रतिज्ञ सोच लो,
प्रशस्त पुण्य पंथ हैं – बढ़े चलो बढ़े चलो।

असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी।
सपूत मातृभूमि के रुको न शूर साहसी।
अराति सैन्य सिंधु में – सुबाड़वाग्नि से जलो,
प्रवीर हो जयी बनो – बढ़े चलो बढ़े चलो।

                         – जयशंकर प्रसाद 

काव्यशाला द्वारा प्रकाशित रचनाएँ 

  • चित्राधार

  • आह ! वेदना मिली विदाई

  • बीती विभावरी जाग री

  • दो बूँदें

  • प्रयाणगीत

  • तुम कनक किरन

  • भारत महिमा

  • अरुण यह मधुमय देश हमारा

  • आत्‍मकथ्‍य

  • सब जीवन बीता जाता है

  • हिमाद्रि तुंग शृंग से

हिंदी ई-बुक्स (Hindi eBooks)static_728x90

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s