दिल के क़राइन- फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’

वहीं हैं, दिल के क़राइन तमाम कहते हैं
वो इक ख़लिश कि जिसे तेरा नाम कहते हैं

तुम आ रहे हो कि बजती हैं मेरी ज़ंजीरें
न जाने क्या मेरे दीवारो-बाम कहते हैं

यही कनारे-फ़लक का सियहतरीं गोशा
यही है मतलए-माहे-तमाम कहते हैं

पियो कि मुफ्त लगा दी है ख़ूने-दिल की क़शीद
गरां है अब के मये-लालफ़ाम कहते हैं

फ़क़ीहे-शहर से मय का जवाज़ क्या पूछें
कि चांदनी को भी हज़रत हराम कहते हैं

नवा-ए-मुर्ग़ को कहते हैं अब ज़ियाने-चमन
खिले न फूल इसे इन्तज़ाम कहते हैं

कहो तो हम भी चलें फ़ैज़ अब नहीं सरे-दार
वो फ़र्क़-मर्तबा-ए-ख़ासो-आम कहते हैं

– फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’

फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’ की अन्य प्रसिध रचनाएँ

  • कुछ इश्क़ किया कुछ काम किया
  • चलो फिर से मुस्कुराएं
  • गुलों में रंग भरे
  • आपकी याद आती रही रात-भर
  • मुझ से पहली सी मोहब्बत मेरे महबूब न माँग (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • रंग है दिल का मेरे (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • अब कहाँ रस्म घर लुटाने की (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • अब वही हर्फ़-ए-जुनूँ सबकी ज़ुबाँ ठहरी है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • तेरी सूरत जो दिलनशीं की है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • खुर्शीदे-महशर की लौ (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • ढाका से वापसी पर (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • निसार मैं तेरी गलियों के अए वतन, कि जहाँ (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • आज बाज़ार में पा-ब-जौलाँ चलो (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • रक़ीब से (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी तेरे जाँ-निसार चले गये (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • बहार आई (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • नौहा (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • तेरी उम्मीद तेरा इंतज़ार जब से है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • जब तेरी समन्दर आँखों में (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • आप की याद आती रही रात भर (मख़दूम* की याद में) (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • चश्मे-मयगूँ ज़रा इधर कर दे (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • चंद रोज़ और मेरी जान फ़क़त चंद ही रोज़ (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • ये शहर उदास इतना ज़ियादा तो नहीं था (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • गर्मी-ए-शौक़-ए-नज़्ज़ारा का असर तो देखो (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • गरानी-ए-शबे-हिज़्रां दुचंद क्या करते (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • मेरे दिल ये तो फ़क़त एक घड़ी है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • ख़ुदा वो वक़्त न लाये कि सोगवार हो तू (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • मेरी तेरी निगाह में जो लाख इंतज़ार हैं (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • कोई आशिक़ किसी महबूब से (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • तुम आये हो न शबे-इन्तज़ार गुज़री है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • तुम जो पल को ठहर जाओ तो ये लम्हें भी (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • तुम मेरे पास रहो (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • चाँद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • दश्ते-तन्हाई में ऐ जाने-जहाँ लरज़ा हैं (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • दिल में अब यूँ तेरे भूले हुए ग़म आते हैं (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • मेरे दिल मेरे मुसाफ़िर (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • आइये हाथ उठायें हम भी (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • न गँवाओ नावके-नीमकश, दिले-रेज़ा रेज़ा गँवा दिया (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • फ़िक्रे-दिलदारी-ए-गुलज़ार करूं या न करूं (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • नज़्रे ग़ालिब (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • तनहाई (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • फिर लौटा है ख़ुरशीदे-जहांताब सफ़र से (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • फिर हरीफ़े-बहार हो बैठे (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • बहुत मिला न मिला ज़िन्दगी से ग़म क्या है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • बात बस से निकल चली है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • बेदम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • इन्तिसाब (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • सोचने दो (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • मुलाक़ात (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • पास रहो (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • मौज़ू-ए-सुख़न (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • बोल (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • हम लोग (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • क्या करें (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • यह फ़स्ल उमीदों की हमदम (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • शीशों का मसीहा* कोई नहीं (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • सुबहे आज़ादी (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • ईरानी तुलबा के नाम (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • सरे वादिये सीना (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • फ़िलिस्तीनी बच्चे के लिए लोरी (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • तिपबं बवउम ठंबा (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • हम जो तारीक राहों में मारे गए (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • एक मन्जर (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • ज़िन्दां की एक शाम (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • ऐ रोशनियों के शहर (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • यहाँ से शहर को देखो * मन्ज़र (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • एक शहरे-आशोब* का आग़ाज़* (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • बेज़ार फ़ज़ा दरपये आज़ार सबा है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • सरोद (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • वासोख़्त (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • शहर में चाके गिरेबाँ हुए नापैद अबके (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • हर सम्त परीशाँ तेरी आमद के क़रीने (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • रंग पैराहन का, ख़ुश्बू जुल्फ़ लहराने का नाम (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • यह मौसमे गुल गर चे तरबख़ेज़ बहुत है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • क़र्ज़े-निगाहे-यार अदा कर चुके हैं हम (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • वफ़ाये वादा नहीं, वादये दिगर भी नहीं (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • शफ़क़ की राख में जल बुझ गया सितारये शाम (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • कब याद में तेरा साथ नहीं, कब हाथ में तेरा हाथ नहीं v
  • जमेगी कैसे बिसाते याराँ कि शीश-ओ-जाम बुझ गये हैं (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • जैसे हम-बज़्म हैं फिर यारे-तरहदार से हम (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • हम मुसाफ़िर युँही मस्रूफ़े सफ़र जाएँगे (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • मेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • हज़र करो मेरे तन से (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • दिले मन मुसाफ़िरे मन (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • जिस रोज़ क़ज़ा आएगी (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • ख़्वाब बसेरा (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • ख़त्म हुई बारिशे संग (शीघ्र प्रकाशित होंगी)

 

शायरी ई-बुक्स ( Shayari eBooks)static_728x90

 

Advertisements

One thought on “दिल के क़राइन- फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s