विनय – सुमित्रानंदन पंत

यह कविता सुमित्रानंदन पंत की की कविता संग्रह पल्लव से ली गयी है। इस संग्रह की अन्य कविताओं के लिए पढ़ें पल्लव ।

मा! मेरे जीवन की हार
तेरा मंजुल हृदय-हार हो,
अश्रु-कणों का यह उपहार;
मेरे सफल-श्रमों का सार
तेरे मस्तक का हो उज्जवल
श्रम-जलमय मुक्तालंकार।

मेरे भूरि-दुखों का भार
तेरी उर-इच्छा का फल हो,
तेरी आशा का शृंगार;
मेरे रति, कृति, व्रत, आचार
मा! तेरी निर्भयता हों नित
तेरे पूजन के उपचार–
यही विनय है बारम्बार।

सुमित्रानंदन पंत

सुमित्रानंदन पंत की अन्य प्रसिध रचनाएँ 

  • पल्लव
  • वसंत श्री
  • मोह
  • विनय
  • झर पड़ता जीवन डाली से (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • याचना (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • मौन निमंत्रण (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • परिवर्तन (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • जीवन-यान (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • नक्षत्र (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • बादल (शीघ्र प्रकाशित होंगी)
  • खोलो मुख से घूँघट (शीघ्र प्रकाशित होंगी)

 

Advertisements

5 thoughts on “विनय – सुमित्रानंदन पंत

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

w

Connecting to %s