मैं क्या क्या छोड़ आया हूँ – ज्ञान प्रकाश सिंह

1

क्लब के सामने ऋषिमा ने, जहाँ फ़ोटो खिंचाया था
गमकते लहलहाते फूलों की क्यारी छोड़ आया हूँ ।

 

3

 

 

पैदल रास्ते पर रुक कर, जिसे ऋषिमा दिखाती थी
पक्की सड़क के मोड़ पर, उस ‘जे’ को छोड़ आया हूँ ।

cx

 

 

जिनकी ओट से बच्चे ने, हाइड-सीक खेला था
बार-बी-क्यू के पास, वे शिलाएँ छोड़ आया हूँ ।

2

 

पर्वत शिखर पर घन घटाओं संग गुज़ारे चन्द पल
माउंट वॉशिंग्टन का,  नज़ारा छोड़ आया हूँ ।

4

 

 

 

नन्हें नन्हें क़दम बढ़ाकर, ऋषिमा जिस पर टहली थी
वह परिपथ छोड़ आया हूँ, वह घाटी छोड़ आया हूँ ।

5

 

पथ के किनारे वृक्ष पर, पंछी ने बनाया था नीड़,
वह रास्ता छोड़ आया हूँ , वह तरुवर छोड़ आया हूँ ।

6

 

 

जागृति के संकेत द्वीप से जो देती मौन निमंत्रण है
सागर के मध्य टापू पर , वह प्रतिमा छोड़ आया हूँ ।

– ज्ञान प्रकाश सिंह

 

 

My Child Hrishima - Front Page

यह कविता लेखक श्री ज्ञान प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘माई चाइल्ड ऋषिमा” से ली गयी है । पूरी पुस्तक ख़रीदने हेतु निकटतम पुस्तक भंडार जायें । आप ये पुस्तक ऑनलाइन भी ऑर्डर कर सकते हैं । सम्पर्क करें kavyashaala@gmail.com पर । भारती  प्रकाशन  मूल्य रु 200 /-

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